चतरा, अगस्त 9 -- चतरा, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। देश की सीमाओं की रक्षा करने के बाद अब चतरा के सेवानिवृत्त फौजी महेश बांडो आदिवासी समाज के अधिकारों और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। सेना से वर्ष 2020 में सेवानिवृत्त होने के बाद वर्ष 2021 से उन्होंने अपना पूरा समय आदिवासी समाज, संस्कृति, परंपरा और अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया है। उनका कहना है कि जिसतरह सैनिक देश की सीमा की रक्षा करता है, उसी तरह समाज के अधिकारों, जल, जंगल और जमीन की रक्षा करना भी जरूरी है। महेश बांडो आदिवासी समाज के बीच रहकर उनके मुद्दों को उठाने के साथ लगातार आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यह भी पढ़ें- Sahibganj News: विश्व आदिवासी दिवस आज : आदिवासियों के सामने अभी लक्ष्य तक पहुंचने की चुनौती आदिवासी अधिकार, जमीन की सुरक्षा, पारंपरिक संस्कृति और प्राकृतिक...