फोन कर बताई लोकेशन तब बची जान, दिल्ली बिल्डिंग हादसे में मोबाइल कैसे बने उम्मीद की डोर?
नई दिल्ली, सितम्बर 6 -- राजन शर्मा, नई दिल्ली दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला इमारत के अचानक भरभराकर गिरने के बाद मलबे में दबे कई छात्र जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहे। चारों तरफ टूटे कंक्रीट और सरियों के बीच फंसे छात्रों के लिए मोबाइल फोन अपनों तक पहुंचने का आखिरी सहारा बन गए। रविवार देर शाम तक कई छात्र अपने दोस्तों और परिचितों को फोन कर बचाने की गुहार लगाते रहे। इन्हीं में एक छात्र नीरज बावा भी था, जिसकी एक फोन कॉल उसके लिए जिंदगी की डोर साबित हुई।मलबे में दबे नीरज ने दोस्त को दी फोन पर जानकारी नीरज हॉस्टल की तीसरी मंजिल पर रहता था और मोतीलाल नेहरू कॉलेज में सेकेंड ईयर का छात्र है। वह मूल रूप से जम्मू का रहने वाला है और करीब डेढ़ साल से सत्य निकेतन में रह रहा था। हादसे के बाद जब उसे होश आया तो उसका मोबाइल फोन उसके पास ही था। मलब...
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