जमशेदपुर, अगस्त 31 -- वन्यजीव अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने और वन्यजीवों की संदिग्ध मौत के मामलों की सही जांच के लिए फॉरेस्टरों को फॉरेंसिक साइंस का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस दौरान वनकर्मियों को घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने, उन्हें सुरक्षित रखने और फॉरेंसिक प्रयोगशाला तक भेजने की प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है। इसका उद्देश्य वन्यजीव अपराध के मामलों में दोषियों तक पहुंचने के लिए जांच को अधिक मजबूत और वैज्ञानिक बनाना है। प्रशिक्षण में विशेष रूप से वन्यजीवों की मौत के बाद बिसरा संग्रह करने की बारीकियों पर जोर दिया जा रहा है। वन्यजीव की संदिग्ध मौत होने पर उसके शरीर से बिसरा और अन्य जरूरी नमूने वैज्ञानिक तरीके से संग्रहित किए जाते हैं। इसके बाद इन्हें फॉरेंसिक प्रयोगशाला भेजकर मौत के वास्तविक कारण की जांच कराई जाती है।वन अधिकारिय...