नई दिल्ली, मई 29 -- देशभर के हाईकोर्ट में फैसले सुनाए जाने में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने शुक्रवार को एक अहम आदेश में स्पष्ट किया कि किसी भी मामले में फैसला सुरक्षित रखने के अधिकतम तीन महीने के भीतर उसे अनिवार्य रूप से सुना दिया जाना चाहिए। व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में यह समयसीमा और भी तेज होनी चाहिए। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए देश भर के सभी उच्च न्यायालयों के लिए बाध्यकारी निर्देश जारी किए हैं। इस ऐतिहासिक कदम का मुख्य उद्देश्य अदालती फैसलों के सुनाए जाने में होने वाली लंबी देरी को रोकना और त्वरित न्याय सुनिश्चित करना है।मुख्य दिशा-निर्देश क्या हैं? बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के मुख्य न्यायाध...