लखनऊ, जुलाई 23 -- परिवहन विभाग की फेसलेस सेवाएं आरटीओ के लिए मुसीबत बनती जा रही हैं। ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ में फेसलेस अप्रूवल की वजह से एक डिलीवरी वैन लगभग सरकारी वाहन के रूप में दर्ज हो गया था। समय रहते पकड़ में न आता तो सरकार को टैक्स का बड़ा नुकसान होता। मामला 20 जुलाई के बाद का है। अब 20 जुलाई के बाद हुए सभी फेसलेस अप्रूवल की जांच की जा रही। यह भी पढ़ें- नोएडा में 2 साल में सड़कों से 1500 CNG ऑटो हुए कम, जानिए क्या है इसकी वजहजांच के तहत प्रकाश में आया मामला ट्रांसपोर्टनगर स्थित आरटीओ में ग्रीन सोलरटेक की ओर से टाटा एस डिलीवरी वैन का टेंपरेरी रजिस्ट्रेशन आवेदन आया। इस वाहन में ऑनरशिप टाइप में 'सेंट्रल गवर्नमेंट' भरा था। फेसलेस सिस्टम में यह आवेदन सीधे अप्रूवल की ओर बढ़ गया। बाबुओं ने जब गाड़ी का ब्योरा देखा तो संदेह हुआ। टाटा एस जैसी क...