लखनऊ, फरवरी 21 -- अस्थमा, सीओपीडी व अन्य सांस संबंधी बीमारी तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में बीमारी की सटीक पहचान व फेफड़े की सेहत को परखने के लिए स्पाइरोमेट्री सबसे भरोसेमंद जांच है। यह जांच मरीज की सांस लेने और छोड़ने की क्षमता को मापकर फेफड़ों की कार्यक्षमता का सटीक आकलन करती है। यह जानकारी केजीएमयू रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने दी। वह शनिवार को रिवर बैंक कालोनी स्थित इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) भवन में कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। आईएमए व लखनऊ एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की ओर से स्पाइरोमेट्री पर कार्यशाला हुई। डॉ. सूर्यकांत ने कहा कि अस्थमा और सीओपीडी जैसे रोगों के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य खांसी या सांस फूलने के रूप में दिखते हैं। ऐसे में स्पाइरोमेट्री से यह स्पष्ट हो जाता है कि सांस के रास्ते में रुकावट कितन...
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