एटा, सितम्बर 7 -- बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर काम करने, मोबाइल-कंप्यूटर के अधिक इस्तेमाल और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कमर, गर्दन, कंधे और घुटनों की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में फिजियोथेरेपी स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है। फिजियोथेरेपी केवल दर्द कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि चोट, फ्रैक्चर, सर्जरी, पैरालिसिस, स्ट्रोक, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी और अन्य न्यूरोलॉजिकल एवं ऑर्थोपेडिक समस्याओं के बाद मरीज की गतिशीलता और आत्मनिर्भरता वापस लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डा. आयुश पालीवाल ने बताया कि हरीश चौहान बड़े हादसे में स्पाइनल कॉर्ड की गंभीर चोट और फ्रैक्चर के बाद सर्जरी से गुजरे। यह भी पढ़ें- Hamirpur News: शोल्डर की इंजरी से मिला आराम, उठने लगा हाथ सर्जरी के बाद उनके लिए चलना मुश्किल था। नियमित...