नई दिल्ली, मई 3 -- पश्चिम बंगाल के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में हुए मतदान को रद्द करते हुए निर्वाचन आयोग ने वहां की सभी बूथों पर 21 मई को फिर से मतदान कराने के जो आदेश दिए हैं, उसके गहरे निहितार्थ हैं। यह चुनाव आयोग की शक्ति की मुनादी करने वाला निर्णय है। हालांकि, इस कदम से आयोग की छवि कोई निखरी नहीं है, बल्कि उसकी नाकामी ही सामने आई है। आखिर जिन अनियमितताओं और धांधली के कारण उसे यह सख्त कदम उठाना पड़ा है, उनको न होने देने के लिए ही उसने बंगाल विधानसभा के मतदान दो चरण में कराए थे। दोनों चरणों में छह दिनों का अंतराल रखा गया था, बल्कि पहले चरण के मुकाबले दूसरे चरण में मतदान भी कम सीटों पर थे। जैसे कि ब्योरे हैं, इस बार पश्चिम बंगाल में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के 2.4 लाख से ज्यादा जवान तैनात किए गए थे। यह संख्या पिछले विधानसभा चुन...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.