धनबाद, मार्च 3 -- होली से एक दिन पूर्व आदिवासी समाज बाहा पर्व मनाता है। संताली आदिवासियों में बाहा पर्व का विशेष महत्व है। शिक्षाविद कालेश्वर किस्कू बताते हैं कि बाहा का अर्थ होता है फूल। आदिवासी प्रकृति पूजक होते हैं। इस मौसम में प्रत्येक वृक्ष पर कपोल, फूल, मंजर और फल लगते हैं। बाहा पर्व तक पूरे फाल्गुन संताली न तो नए फूल खाते हैं न फल। होली के एक दिन पूर्व पारंपरिक तौर से बाहा पर्व मनाया जाता है। बाहा दरअसल चैत्र मास में मनाया जाने वाले पर्व दिशोम बाहा की शुरुआत है। नवदंपति के खुशहाल जीवन की कामना संताली परंपरा के अनुसार नवदंपति का एक वर्ष पूर्व जिस मड़वा में विवाह हुआ था, उसी मंडप में चंगना की बलि दी जाती है। चंगना (छोटी मुर्गी) की बलि देकर खुशहाल जीवन और वंश वृद्धि की कामना की जाती है। कालेश्वर किस्कू बताते हैं कि तीन मुर्गियों की बल...
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