नई दिल्ली, जून 13 -- एक दौर था, जब पिता शब्द का जिक्र आते ही हमारे जेहन में एक सख्त, कम बोलने वाले और अनुशासन प्रिय इंसान की छवि उभरती थी। वो जो देर रात तक काम करता था, बच्चों के स्कूल-टीचर से नहीं मिलता था और घर में डर के साथ सम्मान की मूर्ति माना जाता था। पर, बीते कुछ वक्त में इस रिश्ते की छवि में बदलाव नजर आने लगा है। इसे एक नया दौर कहें तो गलत नहीं होगा। आज के पापा की सोच में, अंदाज में और रिश्तों को निभाने के तौर-तरीकों में बदलाव नजर आने लगा है। कल तक सिर्फ परवरिश में आर्थिक भूमिका अदा करने वाले पिता ने बच्चे की देखभाल में हिस्सेदारी निभानी शुरू कर दी है। अब वे डाइपर बदलने लगे हैं और बीच रात में बच्चे संभालने भी लगे हैं। हमेशा चुप रहने वाले पिता अब अपनी भावनाओं को जाहिर करने लगे हैं। उनमें वो तमाम खूबियां हैं, जो नए जमाने के पिता को ...
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