नई दिल्ली, अगस्त 18 -- मौत की सजा दिए जाने के लिए फांसी की जगह कम दर्दनाक और अधिक मानवीय तरीकों जैसे लीथल इंजेक्शन को अपनाने की मांग करने वाली जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने साफ किया कि फिलहाल देश में फांसी के जरिए ही मृत्युदंड देने की व्यवस्था संवैधानिक रूप से वैध और प्रभावी रहेगी। सर्वोच्च अदालत ने इस मामले से जुड़े तीन पुराने फैसलों (दीना बनाम भारत संघ) को बड़ी बेंच के पास भेजने की मांग को भी यह कहते हुए ठुकरा दिया कि इसके लिए कोई ठोस आधार नहीं है।याचिका में क्या तर्क दिए गए थे? सीनियर वकील ऋषि मल्होत्रा द्वारा दायर की गई इस जनहित याचिका में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 354(5) अब BNSS की धारा 393(5) की संवैधानिकता को चुनौती दी गई थी। यह भी पढ़ें- बार काउंसिल ...