सहरसा, अप्रैल 20 -- सहरसा, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले में किसान कड़ी मेहनत और पूंजी लगा कर खेती करते हैं। हर वर्ष अधिकाधिक उपज और अच्छे मुनाफे की आस में किसानों द्वारा खेती की जाती है। लेकिन मौसम की मार और जलवायु परिवर्तन के दौर में उनकी मेहनत और लागत बढ़ती ही जा रही है। इस अनुपात में उन्हें मुनाफा नहीं मिल पाता है। बेचने में जलालत झेलनी पड़ती है । इसका फायदा बिचौलिए और आढ़ती उठाते हैं। खासकर अच्छी लागत के बाद मौसम की मार से प्रभावित फसल का समय पर मुआवजा भी समय पर नहीं मिल पाता है। मार्च के तीसरे चौथे सप्ताह में आंधी तूफान असामयिक वर्षा पात एवं ओलावृष्टि के फलस्वरूप मक्का और गेहूं की काफी फसल बर्बाद हुई। यह भी पढ़ें- पूरी मेहनत के बाद भी किसानों को नहीं मिलता फसलों का वाजिब दाम लेकिन एक महीने बीत गया और अबतक फसल क्षति का आवेदन भी शुरू नह...
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