बरेली, सितम्बर 10 -- फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों की जांच का दायरा सीएमओ कार्यालय से बढ़कर निजी मेडिकल कालेजों तक भी पहुंच गया है। शुरूआती तफ्तीश में सामने आया है कि सीएमओ कार्यालय में बहरेपन के जो दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाए गए, उनकी आडियोमैट्री जांच निजी मेडिकल कालेजों में हुई थी। ऐसे में अब इसकी भी छानबीन की जा रही है कि वहां जांच कैसे हुई और वहां लगे आधार कार्डों पर क्या पता दर्ज था। जिला अस्पताल में आडियोमैट्री एंड बैरा मशीन नहीं है जिससे श्रवण क्षमता का निर्धारण होता है। ऐसे में सीएमओ कार्यालय से बहरेपन का दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आए लोगों को लखनऊ मेडिकल कालेज रेफर किया जाता है। यह भी पढ़ें- दिव्यांग मेडिकल बोर्ड से हटाए गए डॉक्टर लक्ष्मीकांत कई दिव्यांग इसकी जांच निजी सेंटर और प्राइवेट मेडिकल कालेज में भी कराते हैं। दिल्ली ...