विधि संवाददाता, अप्रैल 4 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज़ के आधार पर नौकरी हासिल करता है तो ऐसी नियुक्ति शुरुआत से ही शून्य मानी जाएगी। भले ही उसने कितनी भी लंबी सेवा पूरी कर ली हो। कोर्ट ने शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लगभग साढ़े तीन दशक तक सहायक शिक्षक के रूप में सेवा देने वाली एक महिला की याचिका को खारिज कर दिया है। वीणा मेनन की याचिका खारिज़ करते हुए न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने यह टिप्पणी की। याची को 1989 में मेरठ के एक जूनियर हाई स्कूल में सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्त किया गया था। विवाद तब शुरू हुआ जब मानव संपदा पोर्टल पर शैक्षिक दस्तावेज अपलोड करने की अनिवार्यता आई। याची ने वर्ष 1984 की अपनी हाईस्कूल की मार्कशीट और प्रमाण पत्र जारी करने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद में आव...