शामली, जून 14 -- एक समय ऐसा था जब जिंदगी की आस टूट रही थी और खून की कमी मौत का कारण बन सकती थी। तभी कुछ लोग फरिश्ते बनकर सामने आए और रक्तदान कर नई जिंदगी दे दी। राजकुमारी पाल कहती हैं, जितेंद्र शर्मा का दिया खून मेरे लिए जीवनदान था, जिसे कभी नहीं भूल सकती। वहीं संतोष देवी कहती हैं, शिक्षा शर्मा ने रक्त देकर मेरी सांसें बचाईं, उनका यह उपकार जिंदगी भर याद रहेगा। शहर की चौधरी चरण सिंह कॉलोनी निवासी जयपाल सिंह बताते हैं कि वर्ष 2005 में उनकी पत्नी राजकुमारी पाल गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। उपचार के दौरान उन्हें तत्काल रक्त की आवश्यकता थी। उस समय शामली में ब्लड बैंक की सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी और बी पॉजिटिव ब्लड ग्रुप की तलाश में परिवार दर-दर भटक रहा था। परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही थी और हर बीतते पल के साथ उम्मीदें कमजोर पड़ रही थीं। यह भी पढ़...