प्रयागराज, फरवरी 17 -- बहरिया, हिन्दुस्तान संवाद। वैष्णवी पढ़ लिखकर डॉक्टर बनना चाहती थी। उसने अस्पताल खोलकर जरूरतमंदों व असहायों की मदद करने और परिवार का नाम रोशन करने का सपना संजोया था लेकिन, सड़क हादसे में दर्दनाक मौत ने उसके सपनों के साथ ही सांसें तक छीन ली। वैष्णवी की असमय मौत के बाद परिजन रो-रोकर बेसुध हो गए। ग्रामीणों की भी आंखें नम हो गईं। सरायगनी निवासी शैलेंद्र मौर्य बहरिया बाजार में मेडिकल स्टोर चलाते हैं। शैलेंद्र ने बताया कि उनकी चार संतानों में सबसे बड़ी बेटी वैष्णवी बचपन से ही पढ़ने में होनहार थी। वैष्णवी अपने पिता शैलेंद्र से कहती थी कि वह पढ़ लिखकर बड़ी डॉक्टर बनेगी और मम्मी-पापा का नाम रोशन करेगी। वह अपनी छोटी बहन श्रेया के साथ ही दोनों भाई शिवेंद्र व वेद को भी खूब मन लगाकर पढ़ाई करने और बड़े होकर डॉक्टर बनने को प्रेरित करत...
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