प्रयागराज, मार्च 28 -- प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रयोगात्मक (प्रैक्टिकल) परीक्षा को लेकर अहम बदलाव किया गया है। अब यदि किसी विद्यार्थी को 50% से कम या 90% से अधिक अंक दिए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षक को इसका स्पष्ट औचित्य (जस्टिफिकेशन) देना होगा। यह निर्णय हाल ही में कुलपति की अध्यक्षता में हुई कार्य परिषद की बैठक में लिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस नए नियम का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है। इसके साथ ही जिन विद्यार्थियों को कम अंक मिलते हैं, उनके लिए अनिवार्य रूप से रिमेडियल (सहायक) कक्षाएं भी चलाई जाएंगी, ताकि उनकी पढ़ाई में सुधार हो सके। नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) लागू होने के बाद विश्वविद्यालय में परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव किए गए हैं। अब आंतरिक मूल्यांकन (सेशनल/सीआईए) क...