सहारनपुर, दिसम्बर 9 -- श्रीमद्भागवत सप्ताह के समापन पर कथा वाचक ने कहा कि जो काम प्रेम के से संभव है, वह हिंसा से संभव नहीं हो सकता है और समाज में कुछ लोग ही अच्छे कर्मों द्वारा सदैव चिर स्मरणीय होते है। सात दिनों तक भगवान श्री कृष्ण के वात्सल्य प्रेम, असीम प्रेम के अलावा उनके द्वारा की गई विभिन्न लीलाओं का वर्णन कर वर्तमान समय में समाज में व्याप्त अत्याचार, अनाचार, कटुता, व्यभिचार को दूर कर सुंदर समाज निर्माण के लिए युवाओं को प्रेरित किया। उन्होंने रास लीला, मथुरा गमन, दुष्ट कंस राजा के अत्याचार से मुक्ति के लिए कंसबध, कुबजा उद्धार, रुक्मणी विवाह, शिशुपाल वध एवं सुदामा चरित्र का वर्णन कर लोगों को भक्तिरस में डुबो दिया। कथा वाचक ने गीता उपदेश के माध्यम से अपने को उस अनुरूप आचरण करने कहा। सात दिनों तक इस कथा में पुरा वातावरण भक्तिमय रहा।
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