बाराबंकी, मार्च 5 -- हैदरगढ़। प्रेम जीवन का सार तत्व है। प्रेम के द्वारा मनुष्य ही नहीं अपितु संसार के समस्त प्राणियों को वश में किया जा सकता है। ये विचार बहुता धाम में आयोजित मानस संत सम्मेलन के चौथे दिन गुरुवार को मानस विद्वान अवधेश शुक्ल तरंग ने व्यक्त किए। बताया कि प्रेम निस्स्वार्थ होना चाहिए। यह कोई अदला-बदली या व्यापार की वस्तु नहीं है। जब जीव के हृदय में निष्काम प्रेम जागृत हो जाता है तब भगवान के दर्शन हो जाते हैं। शबरी, सुतीक्ष्ण एवं अगस्त्य आदि भक्तों के शुद्ध प्रेम को देखकर भगवान राम स्वयं उनके पास गए। उन्हें अविरल भक्ति का वरदान दिया। रामहि केवल प्रेम पियारा। प्रेमदास कुटी के महन्त लालता दास ने कहा कि संसार में गुण और दोष दोनों हैं। दोषरहित तो केवल परमात्मा ही है। इसलिए परमात्मा को पाने के लिए दोषों या संसार की बुराइयों से मन ह...