प्रेम और समर्पन सच्ची मित्रता की पूंजी : स्वामी बाल प्रभु
भागलपुर, जून 16 -- कहलगांव, निज प्रतिनिधि। श्रीमद्भागवत कथा कलियुग का सबसे बड़ा यज्ञ है। इसके श्रवण मात्र से जीवन सफल हो जाता है। उक्त बातें कहलगांव नगर में स्थित एक धर्मशाला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष की कथा वाचन करते हुए कथाव्यास स्वामी बाल प्रभु ने कही। सुदामा चरित्र की कथा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सच्ची मित्रता में धन-दौलत नहीं, प्रेम और समर्पण देखा जाता है। जैसे द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण ने अपने परम मित्र सुदामा के दो मुट्ठी चावल के बदले तीनों लोक दे दिए। मित्रता में छल-कपट व झूठ नहीं होता है। सुख-दु:ख में जो साथ निभाए, वही परम मित्र होता है। यह भी पढ़ें- कृष्ण-सुदामा की मित्रता का भावपूर्ण मंचन आज की मित्रता धनलोभ, स्वार्थ से भरा होता है। इससे सावधान रहने की जरूरत है। भगवान भक्त क...
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