प्रेमचंद साहित्य को समाज के अंतिम व्यक्ति की पीड़ा से जोड़ा
गाजीपुर, जुलाई 31 -- गाजीपुर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से खालिसपुर में मुंसी प्रेमचंद और डॉ. उमाशंकर तिवारी की जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में कवि हरिशंकर पाण्डेय ने कहा कि प्रेमचंद ने साहित्य को समाज के अंतिम व्यक्ति की पीड़ा से जोड़ा। उन्होंने साहित्य को मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया। वहीं डॉ. उमाशंकर तिवारी ने नवगीत को लोकजीवन, भारतीय सांस्कृतिक चेतना और समकालीन यथार्थ की सशक्त अभिव्यक्ति बनाया। आज जब समाज संवेदनहीनता की चुनौती से जूझ रहा है, तब इन दोनों रचनाकारों का स्मरण हमें अपने सांस्कृतिक दायित्वों का बोध कराता है। डॉ. सन्तोष कुमार तिवारी ने अपने पिता डॉ. उमाशंकर को स्मरण करते हुए कहा कि उनका सम्पूर्ण जीवन साहित्य के प्रति निष्ठा, सादगी और मूल्यबोध का जीवन था। यह भी पढ़ें- Ghazipur News...
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