वाराणसी, जुलाई 31 -- वाराणसी। आज हम जिस समाज में जी रहे हैं तथा जिस सामाजिक बदलाव को महसूस कर पाते हैं, वहां तक का सफर तय करने में प्रेमचंद की लेखनी का अतुलनीय योगदान है। प्रेमचंद ने सामाजिक रूढ़ियों का विरोध किया। ये बातें बीएचयू के कुलपति प्रो.अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहीं। वह शुक्रवार को लमही में 'प्रेमचंद मेरे लिए' विषय पर आयोजित परिसंवाद की अध्यक्षता कर रहे थे। मुंशी प्रेमचंद स्मारक एवं शोध संस्थान में बीएचयू कला संकाय की ओर से आयोजित कार्यक्रम में प्रो.चतुर्वेदी ने कहा कि मुंशीजी ने अपने जीवन तथा साहित्य के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाने का प्रयास किया। उनके विचार आज भी लोगों के निर्णयों, दृष्टिकोणों और जीवन-मूल्यों को प्रभावित करते हैं। प्रेमचंद केवल अतीत के साहित्यकार नहीं। वह वर्तमान और भविष्य के भी मार्गदर्शक हैं। उन्होंने प्रे...