प्रेमचंद का साहित्य भारतीय संस्कृति, सामाजिक न्याय का सशक्त दस्तावेज
चंदौली, अगस्त 1 -- सकलडीहा, हिन्दुस्तान संवाद। सकलडीहा पीजी कॉलेज में शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार शुरू हुआ। राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रेमचंद के सपनों का भारत पर वक्ताओं ने विचार रखे। अध्यक्षता करते हुए कालेज के प्राचार्य प्रोफेसर प्रदीप कुमार पांडेय ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य भारतीय संस्कृति, सामाजिक न्याय एवं मानवीय मूल्यों का सशक्त दस्तावेज हैं। उनके सपनों के भारत की परिकल्पना आज भी उतनी ही सार्थक है। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. आनंद वर्धन शर्मा ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियां भारत का वास्तविक चेहरा प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने प्रेमचंद के साहित्य के माध्यम से उनके योगदान को रेखांकित किया। यह भी पढ़ें- प्रेमचंद का साहित्य आज भी सामाजिक चेतना का सबसे सशक्त दस्तावेज़ : प्रो. अवधेश प्रधान विशिष्ट अतिथि डॉ. अशोक कुमार ज्यो...
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