प्रेमचंद का साहित्य आज भी सामाजिक चेतना का सबसे सशक्त दस्तावेज़ : प्रो. अवधेश प्रधान
गया, जुलाई 31 -- मगध विश्वविद्यालय के हिन्दी और पत्रकारिता व जनसंचार विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर 'हमारे लिए प्रेमचंद' विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन प्रेमचंद सभागार में किया गया। मुख्य अतिथि बीएचयू के पूर्व आचार्य प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज की पीड़ा, संघर्ष और बदलाव की आकांक्षा का सशक्त दस्तावेज़ है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने किसानों, मजदूरों, दलितों और वंचित वर्ग की आवाज़ को साहित्य के केंद्र में स्थापित किया तथा उनकी रचनाएं आज भी सामाजिक चेतना को नई दिशा देती है। जेएनयू की प्रो. गरिमा श्रीवास्तव ने कहा कि प्रेमचंद ने स्त्री जीवन की जटिलताओं को गहरी संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया। यह भी पढ़ें- प्रेमचंद की वर्तमान महत्ता पर संगोष्ठी विशिष्ट अतिथि प...
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