भभुआ, मार्च 30 -- पेयजल योजनाओं के दौर में पूर्वजों का जलस्रोत उपेक्षित, संरक्षण की मांग तेज ग्रामीण बोले, सफाई, गहरीकरण और अतिक्रमण हटे, तभी बचेगी पुरानी पहचान (बोले भभुआ) भभुआ, नगर संवाददाता। हर घर नल का जल और अन्य सरकारी पेयजल योजनाओं के विस्तार के बीच पारंपरिक जलस्रोतों की अहमियत भले कम होती दिख रही हो, लेकिन उनकी उपयोगिता आज भी बरकरार है। इसके बावजूद क्षेत्र के कुछ तालाब और पोखरे लगातार उपेक्षा के शिकार हो रहे हैं। हाटा बाजार स्थित प्राचीन तालाब इसका जीवंत उदाहरण है, जो इन दिनों अतिक्रमण, गंदगी और प्रशासनिक अनदेखी के कारण बदहाली झेल रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, एक समय यह तालाब हाटा बाजार और आसपास के गांवों के लोगों के लिए पानी का प्रमुख स्रोत हुआ करता था। घरेलू जरूरतों से लेकर पशुधन और खेती-किसानी तक में इसके पानी का उपयोग होता थ...