अयोध्या, अप्रैल 27 -- अयोध्या, संवाददाता। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रो. सिद्धार्थ शुक्ल ने भारतीय ज्ञान परंपरा में पर्यावरण संरक्षण के बारे में पीपीटी के जरिए बताया कि भारत में प्राचीन काल से ही पारंपरिक जल संचयन प्रणाली विकसित की गई। उन्होंने कहा कि उत्तर और मध्य भारत में बावड़ी के रूप में सीढ़ीदार कुएं होते हैं जिनका उपयोग जल संचयन के लिए किया जाता है। उनहोंने कहा कि तालाब और पोखर में गांवों के पास वर्षा जल को एकत्र करने के लिए बनाए जाते हैं, ताकि भूजल का स्तर भी बना रहे। यह बातें प्रो. शुक्ल ने अवध विवि के आइक्यूएसी की ओर से संकाय विकास कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता कही। उन्होंने बताया कि राजस्थान के शुष्क क्षेत्र में टांका घर के आंगन या किलों में बना एक भूमिगत टैंक जिसमें छत से वर्षा का जल ए...
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