बिहारशरीफ, जुलाई 13 -- प्राचार्य केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं हैं। बल्कि, वे राष्ट्र के भविष्य निर्माण के सच्चे मार्गदर्शक हैं। एक शैक्षणिक परिसर के प्रबंधन से लेकर माहौल तक के निर्माण में उनकी महती भूमिका होती है। आज के दौर में शिक्षा का भी स्वरूप काफी बदल रहा है। हमें शिक्षा में प्राचीन और आधुनिक विद्याओं का समन्वय कर हम उसे और उपयोगी बना सकते हैं। पुराने से सीखना चाहिए और नए को अपनाना चाहिए, इससे शिक्षकों के शैक्षणिक प्रणाली में निखार आएगा। यह भी पढ़ें- राजगीर में केवी प्राचार्यों का आज लगेगा जमघट, शैक्षणिक सुधार और नवाचार पर होगा मंथन प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का महत्व

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