नवादा, फरवरी 28 -- नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। रंगों और उल्लास का त्योहार होली अब दस्तक चुका है। नवादा जिले के ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर की मुख्य सड़कों तक रौनक दिखने लगी है। बाजार सज चुके हैं, लेकिन समय के साथ होली खेलने के तरीके और रंगों की गुणवत्ता में बड़ा बदलाव आया है। पुरानी पीढ़ी जहां पलाश के फूलों की खुशबू को याद करती है, वहीं आज की युवा पीढ़ी केमिकल युक्त चटकीले रंगों की ओर आकर्षित हो रही है। यह बदलाव न केवल संस्कृति का हिस्सा बन चुका है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा भी बन गया है। आज से दो-तीन दशक पहले नवादा में होली का मतलब प्राकृतिक रंग होता था। गांवों में होली से कई दिन पहले ही पलाश (टेसू) के फूलों को इकट्ठा किया जाता था। उन्हें उबालकर बनाया गया गहरा नारंगी रंग न केवल त्वचा के लिए सुरक्षित होता था, बल्कि औषधीय गुणों ...