रांची, दिसम्बर 14 -- रांची, वरीय संवाददाता। नगड़ा टोली स्थित सरना भवन में आदिवासी बुद्धिजीवियों और समाज के अगुवाओं की बैठक रविवार में हुई। इस दौरान झारखंड के कई ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की गई। विशेषकर सरकार द्वारा प्राकृतिक पूजक आदिवासियों के लिए सरकारी व शैक्षणिक दस्तावेजों से अन्य कॉलम हटाए जाने के विषय पर चिंता जाहिर की गई। वक्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार को सरना, आदिवासी धर्मकोड की मांग भेजना केवल औपचारिकता साबित हुआ, क्योंकि जमीनी स्तर पर सरकारी और स्कूली दस्तावेजों में अन्य कॉलम हटाने से आदिवासी सहित अन्य समुदायों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इससे सरना धर्मांवलंबियों आदिवासियों की धार्मिक पहचान पर संकट उत्पन्न हुआ है। झारखंड की खतियानी जमीनों की सुरक्षा, आदिवासी अस्मिता, जल, जंगल-जमीन की रक्षा व संवैधा...
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