कौशाम्बी, मार्च 1 -- आस्था और भक्ति का प्रतीक होलिका दहन इस बार जनपद में पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ मनाने की तैयारी है। भगवान नरसिंह और भक्त प्रह्लाद की भक्ति से जुड़ा यह विशेष पर्व भारतीय संस्कृति की अमिट पहचान है। परंपरागत रूप से होलिका में सूखे पत्ते, उपले, चंदन, कपूर, घी और हवन सामग्री डाली जाती थी, जिससे वातावरण शुद्ध होता था। लेकिन समय के साथ इसमें बहुत बदलाव आया और गीली लकड़ी, प्लास्टिक, केमिकल युक्त रंग व अन्य हानिकारक पदार्थ होलिका में जलाए जाने लगे। जिसका पर्यावरण पर काफी प्रभाव पड़ रहा है । विशेषज्ञों के अनुसार इससे निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है, जिससे सांस संबंधी रोग, एलर्जी और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसका दुष्प्रभाव पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों और वन्य जीवों पर भी पड़ता है। ------ इको-फ्रेंडली दहन के लिए की अ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.