सासाराम, अप्रैल 21 -- नोखा। प्रखंड क्षेत्र में प्रशासनिक सख्ती के बावजूद पराली जलाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। किसानों द्वारा खेतों में खुलेआम पराली जलाकर प्रशासनिक आदेशों को ठेंगा दिखाया जा रहा है, जिससे ना सिर्फ पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि खेतों की उर्वरा शक्ति भी लगातार कमजोर होती जा रही है। विदित हो कि शुरुआती दौर में गेहूं के डंठलों में आग लगने की घटनाओं से सैकड़ों बीघा में खड़ी फसलें जलकर नष्ट हो गई थीं। इससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी। अब स्थिति यह है कि पराली जलाने की प्रवृत्ति के कारण मवेशियों के चारे का भी गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है, जिससे पशुपालकों की परेशानी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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