प्रभु केवल जगत के पालनहार ही नहीं पतित पावन शरणागवत्सल भी है: चंचल शर्मा
शामली, मई 28 -- शामली। श्री नारायण कुटुम्ब ट्रस्ट एवं श्री मंदिर हनुमान टीला द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का समापन हो गया। कथा व्यास आचार्य चंचल शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा सोलह हजार एक सौ आठ कन्याओं के उद्धार एवं विवाह के प्रसंग को प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रभु केवल जगत के पालनहार ही नहीं, अपितु पतित पावन और शरणागतवत्सल भी हैं। भगवान ने समाज द्वारा तिरस्कृत एवं पीड़ित कन्याओं को सम्मान देकर यह संदेश दिया, ईश्वर की शरण में आने वाला प्रत्येक जीव पूजनीय बन जाता है। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के मिलन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सच्ची मित्रता वैभव और अभाव से ऊपर होती है। यह भी पढ़ें- स्वार्थरहित समर्पण ही सच्ची मित्रता का आधार सुदामा की निष्काम भक्ति, विनम्रता और प्रेम से प्रसन्न होकर भगवान ने बिना मांगे ही अपने भक्त पर कृपा की वर्षा कर ...
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