प्रदोष व्रत में किस समय करनी चाहिए भगवान शिव की पूजा, मिलता है पूजा का विशेष फल
नई दिल्ली, अगस्त 8 -- सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति का सबसे पावन समय माना जाता है। इस दौरान किए गए व्रत और पूजा का विशेष फल मिलता है। प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी को आता है, लेकिन सावन में इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस साल सावन का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त 2026 को सोमवार को पड़ रहा है। इस दिन सोमवार व्रत और प्रदोष का संयोग बन रहा है, जो भक्तों के लिए अत्यंत शुभ है।प्रदोष काल का सही समय क्या है? प्रदोष काल वह समय होता है, जब सूर्य अस्त हो रहा होता है और चंद्रमा उदय की ओर बढ़ रहा होता है। इस समय ना तो पूरा अंधेरा होता है और ना ही पूरा उजाला। दोनों का मेल होने वाले इस संधिकाल को प्रदोष कहा गया है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल 10 अगस्त को प्रदोष काल शाम 6:37 बजे से रात 8:48 बजे तक रहेगा। इसी समय शिवलिंग पर जल बेलपत्र और अन्य साम...
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