बिजनौर, फरवरी 11 -- उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रदेश का बजट पेश किया गया। जिसमें सभी विभागों को कुछ ना कुछ मिला है परंतु बेसिक शिक्षा विभाग का 77000 करोड़ का बजट होने के बावजूद शिक्षामित्र को केवल कैशलेस चिकित्सा से जोड़ा गया है जबकि शिक्षामित्र की मूल समस्या जो कि पिछले 8 वर्षों से मानदेय बढ़ाने की मांग की जा रही थी उसे पर उत्तर प्रदेश सरकार में कोई ध्यान नहीं दिया है । प्रस्तुत बजट में शिक्षामित्र के मानदेय वृद्धि का कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया जिससे प्रदेश के शिक्षामित्र में एक बार फिर निराशा उत्पन्न हुई है। प्रदेश के लाखो शिक्षामित्रो का परिवार मानदेय पर आश्रित है । आज की महंगाई के दौर मे दस हजार रूपये मे घर का खर्च चलना तो दूर की बात है स्कूल आने जाने व अध्यापक पद गरिमा को मेनटेन करने मे भी ज्यादा खर्च हो जाता है। प्रदेश के शिक्षामित्र भु...