बागपत, जनवरी 7 -- बड़ौत। नगर के अजितनाथ सभागार मंडी में धर्म सभा आयोजित की गई। जिसमें प्रवचन देते हुए विमर्श सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य प्रतिस्पर्धा, प्रदर्शन और प्रतिष्ठा की आकांक्षा से भरा होने के कारण दु:खी है। मनुष्य सदैव दूसरे के समान बनने की कोशिश करता है और उसी पुरुषार्थ में रत रहता है। प्रतिस्पर्धा में सफल होकर वह प्रदर्शन करने लगता है, और उसे अपनी प्रतिष्ठा समझकर स्वयं के जीवन को धूमिल करने लगता है। मनुष्य प्रतिस्पर्धा के कारण जिसे सुख का साधन समझता है, वही दु:ख का कारण बन जाता है। दु:ख बाहर से नहीं, भीतर की आकांक्षा से आता है। वस्तु की क्षण भंगुरता का ज्ञान उसे प्रतिस्पर्धा नहीं कराता, अपितु संतोषी बनाता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
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