कटिहार, जनवरी 30 -- कटिहार, निज प्रतिनिधि छोटी नदियों व जलस्रोत का अस्तित्व खत्म होने से देसी मछलियां भी बहुत कम मिल रही है। कैटफिश प्रजाति की सिंघी, देसी मांगुर, कबई व टेंगरा जैसी देसी मछली विलुप्त हो रही है। देसी मछली का उत्पादन बढ़ाने व मत्स्यपालकों को इसके लिए प्रेरित करने को लेकर सरकार मत्स्यपालन को न सिर्फ अनुदान दे रही है बल्कि देसी नस्ल की मछलियों का जीरा तैयार करने को लेकर बढ़ावा भी दिया जा रहा है। मत्स्य प्रजाति विविधिकरण योजना के तहत देसी मछलियों के उत्पादन को लेकर मत्स्यपालकों को जागरूक किया जा रहा है। तालाब के साथ बायोफ्लोक टैंक व चौर में मछली पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। तालाब, चौर व टैंक में मछली पालन को लेकर अनुदान लेने के लिए किसानों से आवेदन भी लिया जा रहा है। इसके लिए जिले को छह यूनिट का लक्ष्य दिया गया है। मत्स्य प्र...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.