पूर्णिया, अप्रैल 15 -- बनमनखी, संवाद सूत्र। मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और प्रकृति प्रेम का प्रतीक लोक पर्व 'जुड़ शीतल' आज घर-घर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह पर्व जीवन में संतुलन, शीतलता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। अब यह पर्व मिथिलांचल के साथ-साथ कोसी, सीमांचल और अंग क्षेत्र में भी लोकप्रिय हो गया है। इस पर्व के अवसर पर लोग बासी व शीतल भोजन ग्रहण करते हैं और छायादार व औषधीय वृक्षों को जल अर्पित कर प्रकृति के प्रति आस्था प्रकट करते हैं। घर के बड़े-बुजुर्ग छोटे सदस्यों के सिर पर ठंडा जल डालकर उन्हें 'जुड़ाए' रहने यानी सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। यह भी पढ़ें- सुपौल : जुड़-शीतल पर बुजुर्गों से सुख-समृद्धि का लिया आशीर्वाद, मैथिली नववर्ष की शुरुआत जुड़ शीतल के दिन चूल्हा उपवास रखा जाता है और चूल्हे को विश्राम दिया ज...