प्रकृति और कृषि से जुड़ी हैं गोंड आदिवासियों की परंपराएं: डॉ. चंदेला
रांची, अगस्त 17 -- रांची, विशेष संवाददाता। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए), क्षेत्रीय केंद्र रांची और रामकृष्ण मिशन विवेकानंद एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरकेएमवीईआरआई) के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को मोरहाबादी स्थित आरकेएमवीईआरआई परिसर में 'गोंड आदिवासियों की लोक परंपराएं' विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। इसमें गोंड आदिवासी समाज की समृद्ध लोक व मौखिक परंपराओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक मूल्यों पर विस्तार से मंथन हुआ। मुख्य वक्ता अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (रीवा) के हिंदी विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ. लक्ष्मीकांत चंदेला ने गोंड समाज की सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डाला। उन्होंने मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की नागपंचमी, होम, अलाव, बिदरी (गांव बांधना), नवखाना और घाट जैसी परंपराओं का उदाहरण देते हुए बताया...
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