लखनऊ, जून 3 -- बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी) में बुधवार को विश्व पर्यावरण दिवस-2026 के तहत प्रकृति अभिलेख और जलवायु भविष्य: जलवायु अनुकूलन और सतत विकास की दिशा में मार्ग विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। हाइब्रिड मोड में आयोजित इस कार्यशाला में देशभर से करीब 120 प्रतिभागी शामिल हुए। कार्यशाला का उद्देश्य झीलों, समुद्री अवसादों और जैव-विविधता जैसे प्रकृति अभिलेखों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन के इतिहास को समझते हुए भविष्य की चुनौतियों के समाधान तलाशना है।उद्घाटन सत्र में बीएसआईपी के निदेशक प्रो. महेश जी. ठक्कर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल प्रतीकात्मक आयोजनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने बताया कि भूवैज्ञानिक इतिहास में दर्ज प्रकृति अभिलेख यह समझने में मदद करते ...