दरभंगा, अगस्त 9 -- बैद्यनाथ झा बैजू,लहेरियासराय। पौधरोपण अभियानों में केवल पौधे लगाने के आंकड़े पेश किए जाते हैं, उनके जीवित रहने (सर्वाइवल रेट) का कोई हिसाब नहीं रखा जाता है। इस वजह से करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद जमीन पर हरियाली नहीं दिखती और योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाती हैं। जानकारों का कहना है कि पौधरोपण वर्षा ऋतु में ही किया जाना चाहिए ताकि पौधों को निरंतर प्राकृतिक जल मिले। लेकिन आज वर्षा की अनिश्चितता के बावजूद सिर्फ कागजी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पौधरोपण कर दिया जाता है। इसके बाद उनकी देखभाल नहीं होती। परिणामत: हर साल लाखों की संख्या में किया जाने वाला यह कार्य महज उत्सव बनकर रह गया है। यह भी पढ़ें- Banka News: सार्वजनिक स्थलों पर लगे पौधों को बचान विभाग की बड़ी चुनौती पिछले दो दशकों के पौधरोपण के आंकड़ों को देखें तो...