किशनगंज, अप्रैल 14 -- किशनगंज. वरीय संवाददाता वर्तमान समय में न्यायिक प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का डिजिटलीकरण अत्यंत आवश्यक हो गया है। कागजी प्रणाली में देरी, अभिलेखों के सुरक्षित रख-रखाव की कठिनाई तथा सूचनाओं के आदान-प्रदान में बाधाएं अक्सर न्याय की गति को प्रभावित करती हैं। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से न केवल अभिलेख सुरक्षित रहते हैं, बल्कि पुलिस, प्रशासन और न्यायालय के बीच समन्वय भी बेहतर होता है, जिससे पीड़ित परिवारों को समय पर न्याय मिल पाता है। इसी क्रम में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का डिजिटलीकरण कि समीक्षा जिला पदाधिकारी विशाल राज के द्वारा सोमवार को की गई है।संस्थानवार यह भी पढ़ें- पोस्टमार्टम रिपोर्ट का डिजिटलीकरण: पारदर्शी और त्वरित न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण पहल प्रगति रिपोर्ट से सामने...