किशनगंज, अप्रैल 19 -- किशनगंज। संवाददाता सुबह की हल्की धूप जैसे ही चिचुआ बाड़ी दक्षिण (केंद्र संख्या 54) के आंगनबाड़ी परिसर में उतरती है, वहां का दृश्य अपने आप में बदलाव की कहानी कहता है। क्यारियों में लहलहाती हरी सब्ज़ियों के बीच छोटे-छोटे बच्चे उत्साह से इधर-उधर घूमते नजर आते हैं। कोई पालक की पत्तियां तोड़ रहा है, तो कोई टमाटर को छूकर पहचानने की कोशिश कर रहा है। तभी एक बच्चा मुस्कुराते हुए सेविका शमीमा खातून के पास आता है और कहता है-"दीदी, आज हम यही साग खाएंगे। यह दृश्य अब यहां की रोज़मर्रा की पहचान बन चुका है, लेकिन कुछ साल पहले तक यह केंद्र भी एक साधारण आंगनबाड़ी की तरह ही था, जहां बच्चों की उपस्थिति सीमित थी और पोषण को लेकर जागरूकता भी कम थी।सामान्य यह भी पढ़ें- किशनगंज: खेल-खेल में सीख रहे पोषण का महत्व, बच्चों में दिखा सकारात्मक बदलाव ...
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