किशनगंज, मार्च 27 -- टेढ़ागाछ। एक संवाददाता बिहार ने पिछले कुछ वर्षों में बिजली के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। गांव-गांव तक बिजली पहुँचाने के सरकारी दावों ने राज्य की छवि बदली है, लेकिन टेढ़ागाछ प्रखंड की जमीनी हकीकत इन दावों से इतर नजर आ रही है। यहां बिजली तो पहुँची है, लेकिन वह सुविधा के बजाय उपभोक्ताओं के लिए 'खतरा' और 'सिरदर्द' अधिक बन गई है। टेढ़ागाछ की सभी 12 पंचायतों भोरहा, हाटगांव, खानियाबाद , चिल्हनिया, हवाकोल सहित अन्य पंचायतो में बिजली की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन विडंबना यह है कि अधिकांश जगहों पर हाई-वोल्टेज तार लोहे या कंक्रीट के पोल के बजाय बांस-बल्ली के सहारे लटक रहे हैं। सड़कों और घरों के ऊपर से गुजरते ये जुगाड़ वाले तार आए दिन टूटकर गिरते रहते हैं। स्थानीय लोगों के लिए रास्ते पर चलना किसी जानलेवा जोखिम से कम नहीं है।...