पॉश संबंधी मसौदे पर संयुक्त रूप से विचार करे केंद्र
नई दिल्ली, सितम्बर 18 -- सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि 'पॉश' अधिनियम के प्रावधानों को कानूनी पेशे से जुड़ी पीड़ित महिलाओं पर 'सख्ती से या एक ही तरीके से' लागू नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने केंद्र व अन्य से कहा कि वे पॉश संबंधी नियमों के मसौदे पर संयुक्त रूप से विचार करे। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने केंद्र सहित सभी पक्षों से कहा कि वे सभी अदालतों, ट्रिब्यूनलों और अर्ध-न्यायिक प्राधिकरणों पर लागू होने वाले नियमों का मसौदा तैयार करने के लिए संयुक्त रूप से विचार-विमर्श करें। शीर्ष अदालत दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें से एक याचिका राज्य बार काउंसिल या बार एसोसिएशन में रजिस्टर्ड महिला वकीलों के लिए 'कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013' (पॉश) ...
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