नई दिल्ली, अक्टूबर 4 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज होने वाले मामलों और आरोपी के खिलाफ 'दोषी होने की कानूनी धारणा' को लेकर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि पॉक्सो कानून में कड़े प्रावधान होने का अर्थ यह नहीं है कि अभियोजन पक्ष द्वारा लगाए गए हर आरोप को अंतिम सत्य मान लिया जाए। हाईकोर्ट ने जोर देकर कहा कि अदालतों का यह प्राथमिक और मौलिक कर्तव्य है कि वे सबूतों और गवाहों का निष्पक्ष विश्लेषण करें। इसी टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने बुराड़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में निचली अदालत द्वारा आरोपी सूरज कुमार को सुनाई गई 20 साल की कठोर कारावास की सजा और साढ़े 10 लाख रुपये के मुआवजे के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही उसे तत्काल रिहा करने का आदेश...