पेशे से कटते जा रहे हुनरमंद हाथ, सस्ता ऋण व विश्वकर्मा योजना का मिले साथ
मुजफ्फरपुर, जून 11 -- मुजफ्फरपुर। मुश्किल दौर से गुजर रहे हुनरमंद हाथ पेशे से कटते जा रहे हैं। परिवार का पेट पालने के लिए कुछ आभूषण कारीगर दुकानों में नौकरी करने लगे हैं, तो कई टोटो चलाकर गुजारा कर रहे हैं। इनका कहना है कि एक वक्त था जब बंगाल, महाराष्ट्र, वाराणसी समेत स्थानीय कारीगर मिलाकर दस हजार से अधिक को काम से फुर्सत नहीं मिलती थी, लेकिन अब फाकाकशी की नौबत है। पुरानी बाजार आभूषण मंडी के कारीगरों ने बताया कि कोरोना काल के बाद थोड़ा संभले, लेकिन पिछले दो वर्षों में स्थिति काफी खराब हो गई है। मंडी में कैंप लगाकर विश्वकर्मा योजना का लाभ और बैंकों से सस्ती दर पर ऋण मिले तो पेशे को जिंदा रखने की जुगत कर सकें।
कारीगरों की स्थिति जिले के आभूषण कारीगरों को काम नहीं मिलने से उनके लिए परिवार का पेट पालना कठिन हो गया है। उनका कहना है कि सरकार क...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.