नई दिल्ली, सितम्बर 23 -- एक कर्मचारी से सरकार ने लगभग 30 साल सेवाएं लीं और बाद में कह दिया कि ये पद तो था ही नहीं इसलिए आपको पेंशन नहीं दी जा सकती। इस पर हैरानी जताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सेवा ली है तो पेंशन देनी ही पड़ेगी। कोर्ट ने कहा है कि खेल के नियम बीच में बदले नहीं जा सकते। मामला कुछ ऐसा है कि साल 1997 में कनिष्ठ लिपिक के दो सामान्य पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया। लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के बाद 31 जुलाई 1997 को चयन सूची में बालकृष्ण शर्मा का नाम दूसरे स्थान पर आया। इसके बाद 12 सितंबर 1997 को उसे नियुक्ति पत्र जारी किया गया और उन्होंने पीलीभीत जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में कार्यभार संभाला। यह भी पढ़ें- इन केंद्रीय कर्मचारियों के परिवार के लिए अब 100% पेंशन, सरकार ने किया साफकरता रहा काम चयन प्रक्रिया पूरी हो...