लखनऊ, जुलाई 7 -- लखनऊ, विधि संवाददाता यह भी पढ़ें- विभागीय परीक्षा नहीं बन सकती एसीपी में बाधा : कोर्ट हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अपने एक निर्णय में कहा है कि सरकारी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही में आरोप सिद्ध करने के लिए विभाग को मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत करनी होगी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सिर्फ दस्तावेजों के आधार पर और बिना नियमित मौखिक जांच किए कर्मचारी को दंडित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के प्रावधानों का उल्लंघन है। यह भी पढ़ें- फर्म या ठेकेदार को अनिश्चितकाल के लिए ब्लैकलिस्ट नहीं किया जा सकता, हाई कोर्ट का आदेशमामला विवरण न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार ने यह आदेश तत्कालीन एसडीएम मोहनलालगंज रहे, संतोष कुमार सिंह ...