गोरखपुर, जून 18 -- गोरखपुर। प्रमुख संवाददाता। गोरखपुर सिर्फ धार्मिक और शैक्षिक पहचान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूर्वांचल की संस्कृति, लोककला और पारंपरिक जीवनशैली का बड़ा केंद्र भी बनेगा। नगर निगम इसके लिए 'पूर्वांचल कला ग्राम' का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। यहां एक ही स्थान पर पूर्वी उत्तर प्रदेश की कला, शिल्प, संगीत, खानपान और ग्रामीण जीवन की जीवंत झलक देखने को मिलेगी。

परोपकारिता का लक्ष्य करीब तीन से पांच एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित इस परियोजना पर लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। वास्तुशिल्प में गोरखपुर की टेराकोटा कला, पारंपरिक ईंट निर्माण, बलुआ पत्थर, मिट्टी, बांस और लकड़ी का प्रयोग होगा। पारंपरिक हाट-बाजार में स्थानीय कारीगर अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करेंगे। 'कल्चरल स्ट्रीट' आगंतुकों को लोककला, लोककथाओं, टेराको...