भागलपुर, सितम्बर 23 -- पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। पितरों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा अर्पित करने का पर्व पितृपक्ष 27 सितंबर से शुरू होगा। पंचांग के अनुसार 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध और 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध होगा। पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में परिवार के दिवंगत सदस्यों का स्मरण कर तर्पण, श्राद्ध और दान किया जाता है। इसमें तिल, कुश और जल का विशेष महत्व माना गया है। इस संबंध में आचार्य वंशीधर झा ने बताया कि तर्पण के लिए साफ जल में काले तिल और कुश का प्रयोग किया जाता है। यह भी पढ़ें- पितृपक्ष 27 से, पूर्णिमा श्राद्ध 26 को दक्षिण दिशा की ओर मुख कर श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करते हुए जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद ब्राह्मण भोजन, अन्न-वस्त्र दान अथवा ...